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मनोविज्ञान व बाल विकास

 


विलियम वुडवर्थ- सर्वप्रथम मनोविज्ञान ने अपनी आत्मा का त्याग किया मन को छोड़ा फिर चेतना ख़ोई और वर्तमान में व्यवहार को अपनाए हुए है
व्यवहारिक मनोविज्ञान का जनक-जे. बी. वाटसन

■ Psychopathology Of Everyday Life के लेखक-फ्रायड
■ Principles Of Psychology- विलियम जेम्स
■ Behaviour An Introduction to Comparative Psychology-वाटसन
■ Production Thinking-मैक्स वर्दीमर
■ Principle Of Gestalt Psychology-कोहलर
■ Gestalt Psychology- कोफ़्का
■ Field Theory Of Learning- कर्ट लेविन

प्रयोगात्मक विधि के पद-
1. समस्या का चयन
2. परिकल्पना का निर्माण
3. प्रयोग की व्यूह रचना
4. प्रतिदर्श का चयन
5. आकड़ो को एकत्रित करना
6. परिणाम व विश्लेषण
7. सामान्यीकरण

मनोविज्ञान की विकास यात्रा के समर्थक-
1. आत्मा 【16 वीं शताब्दी】- प्लेटो, अरस्तू, डेकार्ट
2. मन 【17/18 वीं शताब्दी】-पोम्पोनोजी, थॉमस रीड
3. चेतना 【19 वीं शताब्दी】- विलियम वुंट, टिचनर, वाइब्स विलियम जेम्स, जेम्स सल्ली
4. व्यवहार 【20 वीं सदी】- मैकडूगल, वुडवर्थ, वाटसन, थार्नडाइक, स्किनर

मनोविज्ञान के सम्प्रदाय व जनक-
■ संरचनावाद-विलियम वुंट
■ प्रकार्यवाद-विलियम जेम्स
■ मनोविश्लेषणवाद-सिगमंड फ्रायड
■ प्रयोजनवाद-मैकडूगल
■ साहचर्यवाद-जॉन लॉक
■ व्यवहारवाद-जे. बी. वाटसन

History Of Materialism-
पुस्तक लेखक-M F लांजे
"इसी पुस्तक में Psychology का सर्वप्रथम उपयोग हुआ
★ मनोविज्ञान के इतिहास में क्रांतिकारी वर्ष-1912

मनोविज्ञान के सम्प्रदाय-
1. प्रकार्यवाद- शिकागो-जॉन ड्यूवी, ऐंजल ,हार्वेकर
कोलंबिया-विलियम जेम्स, कैटल, थार्नडाइक
2. संरचनावाद-विलियम वुंट, टिचनर
3. साहचर्यवाद-एबिंगहास, एडवर्ड ली, थार्नडाइक, पाँवलोव
4. व्यवहारवाद- J. B. वाटसन, स्किनर, टालमैन, क्लार्क हल, मैक्समुलर
5. पूर्णाकारवाद- वर्दीमर, कोफ़्का, कोहलर
6. क्षेत्र सिद्घांत- कर्ट लेविन
7. मनोविश्लेषणवाद- सिगमंड फ्रायड, जुंग, एडलर
8. वैयक्तिक मनोविज्ञान- अल्फ्रेड एडलर
9. विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान- कार्ल जी.जुंग
10. प्रेरकीय सम्प्रदाय- विलियम मैकडूगल
11. समाज शास्त्रीय- एरिक फ्रोम, करेन हार्मी, हरी स्टैक सलोवन
12. मानवतावादी- कार्ल रोजर्स, मास्लो
13. संज्ञानात्मक- पियाजे, ब्रूनर, मिलर, सीमन, नैसर
14. जैविक उपागम- डार्विन, गॉल्टन, ओल्डस, स्प्रे, मेंडल

व्यक्तित्व के सिद्धान्त-
■ मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त- सिगमंड फ्रायड
■ विश्लेषणात्मक सिद्धान्त-कार्ल जुंग
■ वैयक्तिक मनोविज्ञान-अल्फ्रेड एडलर
■ केरेन हार्नी का व्यक्तित्व सिद्धान्त-केरेन हार्नी
■ व्यक्तित्व का मनोसामाजिक सिद्धान्त-इरिक एरिक्सन
■ व्यक्तित्व का रचना सिद्धान्त- विलियम शैनडॉन
■ व्यक्तित्व का आवश्यकता सिद्धांत- हेनरी मुरे
■ व्यक्तित्व का शीलगुण सिद्धान्त- गार्डन आलपोर्ट
■ आइजेक का व्यक्तित्व सिद्धान्त- H. J. आइजेन्क
■ कारक विश्लेषण सिद्धान्त- आर बी कैटल
■ व्यक्तित्व का क्षेत्र सिद्धान्त-कर्ट लेविन
■ आत्म सिद्धान्त- कार्ल रोजर्स
■ संज्ञानात्मक सिद्धान्त- जॉर्ज कैली
■ सामाजिक अधिगम का सिद्धांत- अल्बर्ट बंडूरा
■ साहचर्य सिद्धान्त- एलेक्जेंडर ब्रैन

प्रमुख खेल सिद्धान्त-
■ अतिरिक्त शक्ति का सिद्धांत-शिलर 【जर्मनी】, स्पेन्सर 【इंग्लैंड】
■ पुनः प्राप्ति का सिद्धांत-लाजरस 【जर्मनी】
■ पुनरावृत्ति का सिद्धांत-स्टेनले हॉल 【अमेरिका】
■ मूल प्रवृत्ति का सिद्धान्त-विलियम मैकडूगल
■ पूर्व अभिनय का सिद्धांत-मालब्रेंस, कार्लगूस 【स्विट्जरलैंड】
■ परिष्कार का सिद्धान्त-अरस्तू 【यूनानी】
■ विश्राम का सिद्धान्त-पैट्रिक
■ खेल ही जीवन है सिद्धान्त-जॉन डीवी 【अमेरिका】

बाल विकास-

फ्रायड के अनुसार-"प्राणी चार-पाँच की उम्र में जो कुछ बनना होता है बन जाता है

क्रो व क्रो के अनुसार-"बाल मनोविज्ञान, वह वैज्ञानिक अध्ययन है, जो व्यक्ति के विकास का अध्ययन गर्भकाल की प्रारंभिक अवस्था से किशोरावस्था तक करता है"

जेम्स ड्रेवर के अनुसार-"बाल मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है जो प्राणी के विकास का अध्ययन जन्म से परिपक्वता तक करती है"

क्रो व क्रो के अनुसार-"बाल विकास वह विज्ञान है जो बालक के व्यवहार का अध्ययन गर्भावस्था से मृत्युपर्यन्त तक करता है

डार्विग के अनुसार-"बाल विकास व्यवहारों का वह विज्ञान है, जो बालक के व्यवहार का अध्ययन गर्भावस्था से मृत्युपर्यन्त तक करता है"

हरलॉक के अनुसार-"बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा है जो गर्भाधान से लेकर मृत्युपर्यन्त होने वाली मनुष्य के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करता है"

सीखने 【अधिगम】 के सिद्धांत-

अधिगम के सिद्धांत अलग-अलग मान्यताओं पर आधारित है और उन्ही के अनुरूप सीखने के प्रक्रिया को स्पष्ट करते है अधिगम के सिद्धान्तों को प्रमुख रूप से व्यवहारवादी/व्यवहार वादी साहचर्य सिद्धान्त और संज्ञानवादी सिद्धान्त में बाँटा जा सकता है अधिगम के व्यवहारवादी सिद्धान्त को अधिगम के सम्बन्धवादी सिद्धान्त भी कहते है इस वर्ग के सिद्धांत वस्तुतः सीखने की प्रक्रिया को उद्दीपक व अनुक्रिया के मध्य सिद्धान्त को स्पष्ट करते है

■ संज्ञानात्मक सिद्धान्त मनोविज्ञान के व्यवहारवादी सम्प्रदाय से तथा संज्ञानात्मक सिद्धान्त गेस्टाल्ट सम्प्रदाय से प्रभावित है
■ थार्नडाइक, पावलव, स्किनर, हल तथा गुथरी के अधिगम सिद्धान्त सम्बन्धवादी मनोविज्ञान वर्ग के अंतर्गत है जहां थार्नडाइक द्वारा प्रतिस्थापित विचार प्रणाली को संयोजनवाद के नाम से जाना जाता है वहां वाटसन, पावलव तथा अनुबंधन या प्रतिबद्धता का नाम दिया गया
■ अंतर्दृष्टि अधिगम 【कोहलर】, टालमैन, बन्दूरा, लेविन, गैने के सिद्धांत संज्ञानात्मक मनोविज्ञान वर्ग के अंतर्गत आते है

अधिगम के प्रमुख सिद्धांत-
1. प्रयास व भूल का सिद्धांत
2. पुरातन अनुबंधन का सिद्धांत
3. सक्रिय अनुबंधन का सिद्धांत
4. बन्दूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धान्त
5. अंतर्राष्ट्रीय का सिद्धान्त
6. हल का विधिक सिद्धान्त
7. टालमैन का अव्यक्त अधिगम सिद्धान्त

■ अधिगम एवं भूल का सिद्धांत-【व्यवहारवाद】
ई. एल. थार्नडाइक इस सिद्धांत के प्रवर्तक माने जाते है थार्नडाइक ने 1913 ई. में इस सिद्धांत का प्रतिपादन अपनी पुस्तक "Education Psychology" में किया
इसे उद्दीपन अनुक्रिया का सिद्धांत या आवृत्ति का सिद्धांत भी कहा जाता है

● थार्नडाइक के अनुसार किसी भी कार्य को व्यक्ति एकदम नहीं सीख पाता है सीखने की प्रक्रिया में व्यक्ति प्रयत्न करता है और कठिनाइयां आती है तथा गलती व भूलें भी करता है लगातार कोशिश करने रहने से भूलें व गलती कम होती जाती है इसलिए इस सिद्धांत को प्रयत्न व भूल का सिद्धांत भी कहते है
● थार्नडाइक ने इस सिद्धांत का परीक्षण भूखी बिल्ली पर किया
● उसने प्रयोग में भूखी बिल्ली को पिंजरें में बंद कर दिया पिंजरे का दरवाजा एक खटके के दबने से खुलता था उसके बाहर भोजन 【उद्दीपक】 रख दिया गया
● बिल्ली ने भोजन 【उद्दीपक】 देखकर प्रतिक्रिया आरम्भ की उसने अनेक प्रकार से बाहर निकलने का प्रयत्न किया
● एक बार संयोग से उसका पंजा खटके पर पड़ गया और दरवाजा खुल गया थार्नडाइक ने इस प्रयोग को अनेक बार दोहराया अंत में एक समय ऐसा आया जब बिल्ली किसी प्रकार की भूलें न करके खटके को दबाकर पिंजरे का दरवाजा खोलने लगी
● थार्नडाइक के अनुसार, उद्दीपक 【भोजन】 और प्रतिक्रिया/अनुक्रिया में सम्बन्ध स्थापित हो गए

थार्नडाइक के प्रयोग में- चालक-भूख, लक्ष्य-मछली का टुकड़ा, लक्ष्य प्राप्ति में बाधा-पिंजरे का बंद रास्ता, उल्टे सीधे प्रयत्न-पिंजरें को काटना इत्यादि संयोगवश सफलता-लीवर खुलना, सही प्रयत्न का चुनाव-दरवाजा खोलने का तरीका

प्रयास और त्रुटि सिद्धान्त का शिक्षा में महत्व-
1. मंद बुद्धि बालकों के लिए सिद्धान्त अत्यंत उपयोगी है
2. इस सिद्धांत से बालकों में धैर्य, परिश्रम के गुणों का विकास होता है
3. बालकों में परिश्रम के प्रति रुचि जाग्रत होती है
4. अनुभवों का छात्र लाभ उठा सकते है
5. बालक आशावादी, आत्मनिर्भर बनता है
6. क्रो व क्रो के अनुसार-विज्ञान, गणित व सामाजिक शास्त्र
7. जैसे गम्भीर चिंतन वाले विषयों को सीखने में उपयोगी है
उदाहरण- बच्चे का चलना, सिखना, शर्ट के बटन बंद करना, टाई की गांठ बांधना आदि

E. L. थार्नडाइक के नियम-
■ मुख्य-
1. तत्परता का नियम
2. अभ्यास का नियम
3. प्रभाव का नियम

■ गौण -
1. बहु अनुक्रिया का नियम
2. मानसिक स्थिति का नियम
3. आंशिक का नियम
4. समानता का नियम
5. साहचर्य-परिवर्तन का नियम

मुख्य नियम-
1. तत्परता का नियम- जब कोई संयोजक इकाई किसी सीखने की क्रिया को संपादित करने के लिए तत्पर होती है, तब क्रिया से संपादन में संतोष मिलता है जब इकाई कार्य करने के लिए तत्पर नहीं होती, तब क्रिया को संपादित करने से असंतोष मिलता है
उदाहरण-2 वर्ष के बच्चे को बॉलीवॉल खेलना नही सिखाया जा सकता क्योंकि वह उस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए तत्पर नही है यहां तत्परता का सम्बंध परिपक्वता से भी है

2. अभ्यास का नियम-इसके दो उपनियम है-
उपयोग का नियम एवं अनुप्रयोग का नियम
थार्नडाइक के अनुसार जब किसी अनुक्रिया का पुनरावृत्ति द्वारा अभ्यास किया जाता है तब उद्दीपन अनुक्रिया बंधन शक्तिवान हो जाता है परंतु अनुक्रिया का अभ्यास न होने से यह कमजोर हो जाता है
उदाहरण-सीखे हुए ज्ञान का बार-बार अभ्यास किया जाता है तो अधिगम सुदृढ बन जाता है वही सीखे हुए ज्ञान का अभ्यास न किया जाए तो धीरे-धीरे व्यक्ति सीखा हुआ भी भूल जाता है

3. प्रभाव का नियम-यदि एक कार्य एक स्थिति में संतोष प्रदान करता है तब यह उस स्थिति में संबोधित हो जाता है इसी प्रकार यदि एक कार्य एक स्थिति में असंतोष प्रदान करता है जब वह इस स्थिति में असम्बद्ध हो जाता हैं अध्यापक की कक्षा इतनी सरस, सरल तथा प्रभावी होनी चाहिए कि बच्चे अनुभव के बाद सकारात्मक व्यवहारगत परिवर्तन अनुभव करें अर्थात सुखद अनुभूति करे।

■ थार्नडाइक का प्रथम नियम बताता है कि स्नायु पद्धति किसी कार्य को करने के लिये तत्पर है तब उसके करने से संतोष मिलता है
■ द्वितीय नियम अभ्यास, दोहराना एवं पुनरावलोकन का औचित्य प्रतिपादित करता है

गौण नियम-
1. बहु-अनुक्रिया का नियम-
इस नियम के अनुसार व्यक्ति के सामने नई समस्या आने पर उसे सुलझाने के लिए यह विभिन्न प्रतिक्रियाओं कर हल ढूढने का प्रयत्न करता है यह प्रतिक्रियाएं तब तक करता रहता है जब तक समस्या का सही हल न खोज लें और उसकी समस्या सुलझ नही जाती उसमें संतोष मिलता है
■ थार्नडाइक का प्रयत्न एवं भूल द्वारा सीखने का सिद्धांत इसी नियम पर आधारित है

2. मानसिक स्थिति या मनोवृत्ति का नियम-
इस नियम के अनुसार, जब व्यक्ति सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहता है तो वह शीघ्र लेता है इसके विपरीत यदि मानसिक रूप से किसी कार्य को सीखने के लिए तैयार नही रहता तो उस कार्य को वह सीख नही सकेगा

3. आंशिक क्रिया का नियम-
इस नियम के अनुसार व्यक्ति किसी समस्या को सुलझाने के लिए अनेक क्रियाएं प्रयत्न एवं भूल के आधार पर करता है वह अपनी अंतर्दृष्टि का उपयोग कर आंशिक क्रियाओं की सहायता से समस्या का हल ढूढ लेता है

4. समानता का नियम-इस नियम के अनुसार किसी समस्या के प्रस्तुत होने पर व्यक्ति के पूर्व अनुभव या परिस्थितियों मैसा समानता पाए जाने पर उसके अनुभव स्वतः ही स्थानांतरित होकर सीखने में मदद करते है

5. साहचर्य परिवर्तन का नियम-इस नियम के अनुसार, व्यक्ति प्राप्त ज्ञान का उपयोग अन्य परिस्थिति में या सहचारी उद्दीपक वस्तु के प्रति भी करने लगता है जैसे-कुत्ते के मुंह से भोजन सामग्री देखकर लार टपकने लगती है परंतु कुछ समय के बाद भोजन के बर्तन को ही देखकर लार टपकने लगती है
































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